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डॉ भीमराव बाबा साहेब आंबेडकर जयंती पर निबंध | Dr BR Ambedkar Jayanti Essay in Hindi – Ambedkar Jayanti Essay in Hindi

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Dr. Bhim Rao Ambedkar Jayanti essay 2021

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका कैरियर जानकारी में। दोस्तों आज के टॉपिक जरिये हम आपको बताने वाले हैं । बाबा साहेब के बारे में। 14 April को प्रत्येक वर्ष इनके जन्म दिवस पर इन महान व्यक्ति की आत्मा की श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है। फ्रेंड्स यदि आप अंबेडकर साहब के बारे में जानना चाहते हैं तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें। परीक्षा की दृष्टिकोण से यह टॉपिक अत्यंत महत्वपूर्ण है। तथा हमारे देश के इन महान व्यक्ति के बारे में नॉलेज होना भी जरूरी है।

Ambedkar Jayanti Essay  in Hindi

Dr. Bhim Rao Ambedkar jayanti 2021 ( डॉ भीम राव अम्बेडकर की 130वीं जयंती)

भीम राव अम्बेडकर जयंती प्रत्येक वर्ष 14 April को मनाई जाती है । इस दिन को समानता दिवस या ज्ञान दिवस के रूप में भी मनाते हैं। इनको संविधान का प्रकांड विद्वान भी कहते हैं। इन्होंने मानवाधिकार के लिए कई आंदोलनों में भाग लिया । इस दिवस को उन्हें सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। सर्वप्रथम यह दिवस पुणे शहर में सदाशिव रणपिसे द्वारा मनाया गया। ये अंबेडकर जी के अनुयायी थे। भारत के बौद्ध धर्म स्थलों में अंबेडकर साहब की जयंती को बड़े पर्व के रूप में मनाया जाता है। दलित वर्ग के लोगों ने इनको भगवान की संज्ञा दी है, क्योंकि अंबेडकर साहब जी ने इस ऊंच नीच जाति की खाई को पाटकर सभी को समान लाने का अथक प्रयास किया है। तथा दलित वर्गों को उनके हक का सम्मान दिलाया है। तथा उनके हक के लिए कई कानून बनाये हैं। इसलिए भारत ही नहीं बल्कि विश्व भर में डॉ भीम राव अम्बेडकर साहब का नाम बड़े ही सम्मान व आदर से लिया जाता है।

डॉ भीम राव आंबेडकर साहब का जन्म स्थान

भारत के महा पुरूष बाबा साहेब जी का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के मऊ क्षेत्र में हुआ था। इनके पिता जी का नाम राम जी मालोजी सकपाल था। ये ब्रिटिश काल के अधीन नौकरी करते थे। इनकी माता का नाम भीमाबाई सकपाल था। इनका परिवार हिंदू धर्म में दलित महर जाति का था। इस जाति को लोग अछूत मानते थे। बाबा साहेब जी को अपने बचपन में अर्थात स्कूल तथा समाज में छुआ छूत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। ये बचपन से ही तर्कशील वाले व्यक्ति थे। वे अपनी माँ से अक्सर पूछते थे कि जब सब के रंग एक जैसे हैं सभी इंसानों के शरीर एक जैसे हैं तो हम लोगों को अलग नजरिये से क्यों देखा जाता है। इन सब कुरीतियों से वह बहुत आहत थे। उन्होंने बचपन में ही संकल्प ले लिया था कि जाति जैसी कुरीतियों को बड़े होकर पढ़ लिख कर मिटा देंगे। तथा सबको समान अधिकार दिलाएंगे।

डॉ आंबेडकर साहब ने मैट्रिक 1907 में पास कर विदेश चले गए। वहाँ अमेरिका के कोलंबिया यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया तथा वहाँ M.A और Ph.d की पढाई पूरी की। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में डॉक्ट्रेट की उपाधि प्राप्त की। शिक्षा प्राप्त करने के बाद ये भारत लौट आये। तथा ये एक स्कूल के शिक्षक बन गए। कुछ समय बाद हेड मास्टर बने तथा वे इस पद पर 14 साल तक रहे। बाबा साहेब जी मुख्य रूप से दलित व अन्य निचली जातियों को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रयासरत रहते थे। भारत की स्वतंत्रता के बाद ये दलित वर्ग के नेता तथा समाजसुधारक के रूप में उभर कर आये। बाबा साहेब जी स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री जवाहर लाल नेहरू के कार्यकाल में बने। भारतीय संविधान के निर्माण में सर्वप्रथम इन्हीं का नाम आता है।

डॉ भीम राव अम्बेडकर का समाज व राष्ट्र के लिए योगदान

भीम राव अम्बेडकर पूरे भारत से रुणिवादी, जातिवादी परंपरा को उखाड़ कर फेंक देना चाहते थे। उनका एक मात्र उद्देश्य समाज में व्याप्त असमानता और अपराजिता का अंत करना था। इनके अनुसार जाति व्यवस्था केवल श्रम का विभाजन नहीं था, बल्कि ये एक समाज में रहने वाले मानव का विभाजन था। बाबा साहेब अंबेडकर ने दलितों के अधिकारों के लिए पूर्ण आंदोलनों की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि सभी धर्म के लोग एक ही जगह से जल का निस्तारण करें। तथा सभी जातियों के लिए मंदिरों के कपाट हमेशा खुले रहना चाहिए।

भीम राव अम्बेडकर द्वारा गोलमेज सम्मेलन में दलित वर्ग के पृथक निर्वाचन की मांग

भीम राव अम्बेडकर जी ने जाति प्रथा के विरुद्ध कड़ी आवाजें उठाईं परंतु उनका सकरात्मक परिणाम न मिलने के कारण उन्होंने अछूतों और अन्य जाति के लोग जो इस प्रताडना को झेल रहे थे। पूरे समुदाय के लिए अलग निर्वाचन प्रणाली का प्रस्ताव भीम राव अम्बेडकर द्वारा लंदन में गोलमेज सम्मेलन के दौरान रखा।तथा दलित और अन्य संगठनों के लिए आरक्षण की अवधारणा पेश की। ब्रिटिश सरकार की तो पहले से ही भारत पर ‘ फूट डालो राज करो ‘ की नीति रही है, इसी का फ़ायदा उठाकर उन्होंने दलित वर्ग को सांप्रदायिक पंचाट के रूप में बाँटने का प्रयास किया।


1932 में उस समय महात्मा गांधी पूने के यरवदा जेल मे बंद थे। जब उनको हिंदू धर्म को बाँटने के बारे में पता चला तो वह आमरण अनशन पर बैठ गए। बाबा साहेब आंबेडकर और महात्मा गांधी के बीच मदन मोहन मालवीय द्वारा वार्ता कराई गई। तब महात्मा गांधी ने भीम राव अम्बेडकर को समझाया कि यह नियम वापस ले लें। दलितों के उत्थान के बारे में हम सब मिलकर प्रयास करेंगे। और जाति प्रथा का अंत करेंगे। 1932में बाबा साहेब अंबेडकर और पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा आम चुनाव के भीतर अनंतिम वर्गों के लिए सीटों के आरक्षण के लिए पूना समझौते पर हस्ताक्षर किए।

बाद में महात्मा गांधी द्वारा दलितों के लिए एक पत्रिका निकाल गई जिसका नाम ‘ हरिजन’ था। तथा महात्मा गांधी ने दलितों का नाम बदल कर हरिजन कर दिया। इस आंदोलन में भीम राव अम्बेडकर भी महात्मा गांधी के साथ शामिल हुए थे। बाबा साहेब और महात्मा गांधी प्रमुख व्यक्ति थे जिन्होंने जाति भेदभाव को दूर करने के लिए अंत तक लडाई लडी।

भीम राव अम्बेडकर द्वारा बौद्ध धर्म ग्रहण करना :-

भीम राव अंबेडकर जी ने हिंदू धर्म में व्याप्त अष्प्रश्यता जैसी कुरीतियों का अंत करने के लिए उन्होंने सामाजिक और कानूनिक दोनों रास्ते अपनाये। अधिकार तो मिल गए परंतु सम्मान नहीं मिला। इसलिए बाबा साहेब और उनके साथ उनकी जनता ने हिन्दू धर्म और उसकी धार्मिक क्रियाकलाप जैसे पूजा इत्यादि को त्याग कर दिया। तथा लाखों समर्थकों ने उनके साथ मिलकर बौद्ध धर्म 14 October 1956 को नागपुर में अपना लिया। इस धर्म परिवर्तन का मुख्य कारण धर्म, जाति , शारीरिक, मानसिक दासता से मुक्ति बताया। और बौद्ध धर्म अपनाने का कारण उसमें सभी को समानता अर्थात छुआछूत और जाति प्रथा जैसी कुरीति का ना होना बताया। उन्होंने कहा था कि ” हिंदू धर्म में पैदा जरूर हुआ हूँ परंतु हिंदू होकर मरूँगा नहीं। “

भीम राव अम्बेडकर को भारतीय संविधान का निर्माता कहा जाता है।ये स्वतंत्र भारत के कानून मंत्री थे। डॉ भीम राव अम्बेडकर की मृत्यु 6 December 1956 को मधुमेह के कारण हुई थी। इनका समाधि स्थल चैत्य भूमि मुंबई महाराष्ट्र में है।

निष्कर्ष ( Conclusion)

Dr भीम राव अम्बेडकर को हमारे देश में एक महान नायक के रूप में माना जाता है। बाबा साहेब जी ने अपना पूरा जीवन जाति भेदभाव की समानता के लिए लगा तथा उसमें सफलता भी पाई। संविधान में धर्म और जाति के आधार पर कोई भेदभाव ना हो। ऐसे नियम बनाये। उन्होंने अपने धर्म को बदलने का मुख्य कारण भारत में व्याप्त जाति वाद को बताया।

फ्रेंड्स दिये गये लेख भीमराव अंबेडकर जी की जयंती ( Essay on Dr. Bheem Rao Ambedkar) पर निबंध लिखा गया है। दोस्तों यदि दी हुई जानकारी पसंद आये तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें।

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